राफेल नडाल ने एक बार फिर साबित किया कि वह किस कदर धैर्यवान और कुशल टेनिस खिलाड़ी हैं। बीस्ताद ओपन के क्वार्टरफाइनल में उन्होंने अर्जेंटीना के मारियानो नवोन को तीन सेटों में कड़ी मेहनत के बाद मात दी। स्कोर था 6-7 (2/7), 7-5, 7-5। नडाल के इस संघर्षमयी जीत ने उनके समर्पण और मेहनत को फिर से उजागर किया है।
राफेल नडाल, जो कि 22 बार के मेजर चैंपियन हैं, बीस्ताद ओपन को 2024 पेरिस ओलंपिक्स की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मानते हैं। उन्होंने ओलंपिक्स में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए विशेष रूप से क्ले कोर्ट इवेंट्स पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें बीस्ताद ओपन भी शामिल है। नडाल का मानना है कि क्ले कोर्ट पर सफलता उनकी ओलंपिक्स में स्वर्ण पदक जीतने की संभावनाओं को बढ़ा सकती है।
इस सीजन में नडाल का यह छठा और क्ले कोर्ट पर चौथा टूर्नामेंट है। टूर्नामेंटों का चयन वे खासतौर पर ओलंपिक्स की तैयारियों के मद्देनजर कर रहे हैं। क्ले कोर्ट नडाल का सबसे पसंदीदा सतह है और वे इसी पर अपनी महारत को और निखारना चाहते हैं।
रोमांचक रूप से, नडाल ने बीस्ताद ओपन में डबल्स के लिए कैस्पर रूड के साथ साझेदारी की है। यह कदम न सिर्फ उनके खेल को और धार देने में मदद करेगा, बल्कि टीम के मनोबल को भी बढ़ाएगा। कैस्पर रूड भी इस टूर्नामेंट के शीर्ष खिलाड़ियों में से एक हैं, और यह संयोजन दोनों के खेल को और मजबूत बना सकता है।
इस बार के बीस्ताद ओपन में नडाल के अलावा भी कई टॉप सीड्स हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें कैस्पर रूड और आंद्रे रुबलेव शामिल हैं। ये खिलाड़ी टूर्नामेंट को और भी रोमांचक और उच्च-स्तरीय बनाते हैं। नडाल, जो पहले ही इतने बार ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके हैं, इस प्रकार के टूर्नामेंटों में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिस्पर्धी भावना को और प्रबल करते हैं।
सेमीफाइनल में पहुंचकर नडाल की नजर अब फाइनल पर है। अगले मुकाबले में उन्हें फिर से अपनी उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा और धैर्य का प्रदर्शन करना होगा। नडाल का यह सफर उनके प्रशंसकों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो हर मुकाबले में नडाल की जीत की दुआ करते हैं।
कुल मिलाकर, राफेल नडाल का बीस्ताद ओपन में अब तक का सफर न सिर्फ उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि आगामी पेरिस ओलंपिक्स की तैयारियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। उनके प्रशंसकों को उनसे और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, और नडाल साबित करने के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं कि वे अब भी टेनिस के अजेय योद्धा हैं।
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